Thursday, November 15, 2018

Three Most Haunted Places in Darbhanga



Darbhanga metropolis has a very important place in Bihar in all aspects. Be it from the point of vacationer attraction or, financial importance or be it cultural values and old memories interrelated to exceptional places. Today, we’re going to dig up three most haunted locations in Darbhanga city that is rumoured to be haunted by malevolent spirits and/or faces multiple mysterious phenomenon. Please not palpitate at the same time as we take you on a pulsating adventure to those creepy points of interest in Darbhanga.[Read More]

छाप्रार : भगवान महादेव के मंदिर के लिए प्रसिद्ध



छाप्रार :बहादुरपुर ब्लॉक में स्थित, यह गांव कमला नदी के तट पर भगवान महादेव के मंदिर के लिए प्रसिद्ध है, जिसके आसपास कार्तिक और मगी पूर्णिमा के अवसर पर मेले आयोजित किए जाते हैं।[ और पढ़े]

Wednesday, November 14, 2018

बिहार की इन बेटियों के इशारे पर चलती है मालगाड़ी


बिहार की दो बेटियां जिन्हें चुनौतियां पसंद थीं, दोनों को नौकरी भी मिली एेसी कि पहले किसी ने ना की थी। दोनों की जब नौकरी लगी मालगाड़ी के गार्ड के तौर पर तो लोगों का कहना था अब बेटियां मालगाड़ी भी चला लेंगी। इन दोनों ने साबित कर दिखाया कि लड़कियां क्या नहीं कर सकतीं।
इस साल की 18 जुलाई को सैकड़ों निगाहें ताक रही थीं उन दोनों और गार्ड के उस डिब्बे को, जिस पर गार्ड की ड्रेस में सवार थीं दो युवतियां। [ और पढ़े]

बिहार का एक गांव जहां एक भी व्यक्ति साक्षर नहीं



एक तरफ हम चांद पर घर बसाने की बात करते हैं तो वहीं एक क्षेत्र ऐसा भी है जहां अभाव में लोग कंद-मूल खाकर गुजारा करते हैं। 120 लोगों के टोले में एक भी व्यक्ति साक्षर नहीं । रुपये की पहचान भी उसका रंग देखकर करते हैं। सरकार की कोई योजना आज तक यहां सिरे नहीं चढ़ी।
हम बात कर रहे हैं गया जिले के कठौतिया केवाल पंचायत के बिरहोर टोले की। प्रखंड से 15 किलोमीटर दूर जंगल में बसे बिरहोर जाति के लोग आज भी उपेक्षित हैं। बिहार में विलुप्ति की कगार पर पहुंच चुके इस जाति के लोगों के विकास के लिए सरकार ने पहल तो की पर अपेक्षा से काफी कम। [ और पढ़े]

डुमरांव के राजेश्वर मंदिर में स्थित सूर्यदेव बनें आस्था का केंद्र



डुमरांव के चारों दिशा में ऐतिहासिक व प्राचीन मंदिर मौजूद है| इस क्रम में छठिया पोखरा से अनुमंडल कार्यालय जाने वाले मार्ग पर प्राचीन राजेश्वर मंदिर हर व्यक्ति को आर्कषित करता है| मंदिर में रामजानकी, शिव परिवार, गणेश जी, मां दुर्गा और इस मंदिर में जिले का एकलौता सूर्यदेव की प्राचीन प्रतिमा मौजूद है.|मंदिर वर्षो से बंद रहा| लेकिन 2009 में इसमें लोगों का आवागमन शुरू हुआ| इस मंदिर का निर्माण श्री 108 मती महारानी वेणी प्रसाद कुमारी ने संवत 1856 में कराया है|[ और पढ़े]

Tuesday, November 13, 2018

बड़गांव सूर्य मंदिर: यहां नहाने से मिलती है कुष्ठ रोग से मुक्ति



नालंदा का प्रसिद्ध ओंगारी और बड़गांव के सूर्य मंदिर देश भर में प्रसिद्ध हैं। माना जाता है कि बड़गांव सूर्यमंदिर की स्थापना दूापर युग में हुई थी। भगवान कृष्ण के पुत्र राजा साम्ब का कुष्ठ रोग यही मिले जलस्रोत के पवित्र जल से ठीक हो गया था। राजा साम्ब ने इस स्थल की खुदाई कराई तो भगवान सूर्य की मूर्ति मिली, जो सात घोड़े के रथ पर सवार, रथ के दोनों तरफ कमल का फूल और बीच में सूर्यदेव के भाई श्यमदित, बांयी ओर कल्पादित ,दाहिनी ओर माता अदिति की प्रतिमाएं मिली जो आज मंदिर में स्थापित है[ और पढ़े]

एक चिता पर बना दरभंगा का श्यामा काली मंदिर



बिहार के दरभंगा जिले में बहुत सारे मंदिर है उन्ही मंदिरों में एक रामेश्वरी श्यामा काली मंदिर है। इस काली मंदिर का अपना अलग ही पहचान है। मां के इस मंदिर को भक्त लोग श्यामा माई के नाम से पुकारते हैं।
इस मंदिर के निर्माण की कहानी बहुत ही अलग है। लोगों की मान्यता है कि मां काली का यह मंदिर दरभंगा राज परिवार के महान साधक महाराज रामेश्वर सिंह की चिता पर बना है। इस मंदिर के अंदर दक्षिण दिशा की ओर एक खास स्थान पर आज भी लोग साधक महाराज रामेश्वर सिंह के चिता की तपिस को महसूस करते हैं, फिर चाहे कड़ाके की ठंड ही क्यों न पड़ रही हो।[ और पढ़े]