बिहार केवल परवल के उत्पादन में ही नंबर वन राज्य नहीं है बल्कि परवल के सबसे ज्यादा व्यंजन बनाने में भी बिहार का कोई सानी नहीं है| परवल अच्छी तरह से साधारणतया गर्म और आर्द्र जलवायु के अन्दर पनपती है, इस कारण बिहार की धरती परवल की खेती के बिल्कुल मुफीद है| परवल की लता जमीन पर पसरती है और इसकी खेती नदियों के किनारे खूब की जाती है| इस कारण बिहार में परवल की भुजिया, सब्जी से लेकर मिठाई तक खूब बनायी जाती है| कोई भी पर्व हो, त्योहार हो या उत्सव, यह मिठाई हर वक्त मौजूद रहेगी. इसका मीठा और क्रंची स्वाद सभी को खूब भाता है| इसमें विटामिन-ए, विटामिन-बी 1, विटामिन बी-2 और विटामिन-सी के अलावा कैल्शियम भी भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो कैलोरी की मात्रा कम कर कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करता है|[और पढ़े]
Wednesday, November 21, 2018
रसिया : खीर की बिहारी पहचान
बिहार में खाने के बाद मीठे में सबसे ज्यादा पसंद वाला व्यंजन खीर है| खीर ऐसा मिष्ठान्न है जिसे चावल को दूध में पकाकर बनाया जाता है| खीर दूध, चीनी और चावल से बनती है| इसमें सूखे मेवे डालते हैं| देश के अलग अलग राज्यों में खीर को अलग-अलग नाम से जाना जाता है, लेकिन बनाने की विधि कमोबेश एक होती है| बिहार में खीर के साथ जो प्रयोग हुआ है वह चीनी के जगह पर गुड़ या छोवा डालकर बनाया जाने वाला रसिया|[और पढ़े]
बिहार के इस गांव में करते हैं चमगादड़ों की पूजा
वैशाली: क्या चमगादड़ किसी की रक्षा कर सकते हैं? यकीन नहीं हो तो बिहार के इस गांव चले जाइए। यहां के लोगों का विश्वास है कि एक खास जगह हरने वाले चमगादड़ उनकी रक्षा करते हैं। ग्रामीण कोई भी शुभ कार्य इन चमगादड़ों की पूजा किए बगैर नहीं करते हैं। बिहार के वैशाली जिला का यह गांव है सरसई (रामपुर रत्नाकर)। यहां इन चमगादड़ों को देखने के लिए पर्यटकों की भीड़ लगी रहती है।
बिहार के वैशाली जिले के राजापाकर प्रखंड में कए गांव है ‘सरसई’ (रामपुर रत्नाकर), जहां के लोग चमगादड़ों की पूजा करते हैं। वे मानते हैं कि चमगादड़ उनकी रक्षा भी करते हैं। मान्यता है कि चमगादड़ समृद्धि की प्रतीक देवी लक्ष्मी के समान हैं।[और पढ़े]
बौंसी का यह पहाड़ बयां करता है समुद्र मंथन की कहानी
बिहार के बांका जिले के ब्रह्मपुर पंचायत में बौंसी नामक एक स्थान है। जो प्रसिद्ध मंदार पर्वत की तराई में अस्थित है। मंदार का मतलब ही स्वर्ग होता है। अरबों साल पहले पुराणों में वर्णित मंदार पर्वतमाला आज भी सनातन संस्कृति की कहानी को बयान करता है।
पर्वत के तराई में स्थित यह पावन पवित्र तालाब अपने चमत्कारिक गुणों के कारण प्राचीन काल से प्रसिद्ध रहा है। मनोहारी वातावरण में बना यह जलाशय आज भी जनमानस के लिए कष्ट निवारण के कारण आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इस जलाशय के बीच लक्ष्मी नारायण जी मंदिर का भव्य मंदिर बिराजमान है जिस कारण इस क्षेत्र को पाप हरणी लक्ष्मी नारायण मंदिर कहा जाता है।[और पढ़े]
Tuesday, November 20, 2018
मूंग के लड्डू :मगध के मिष्ठान्न की परंपरा
1775 के आसपास नजीर अकबराबादी अपनी कविता हमें अदाएं दिवाली की ज़ोर भाती हैं, में लिखते हैं कि मगध के मूंग के लड्डू से बन रहा संजोग, दुकां-दुकां पे तमाशे यह देखते हैं लोग| खिलौने नाचें हैं तस्वीरें गत बजाती हैं, बताशे हंसते हैं और खीलें खिलखिलाती हैं| जो बालूशाही भी तकिया लगाये बैठे हैं, तो लौंज खजले यही मसनद लगाते बैठे हैं| उठाते थाल में गर्दन हैं बैठे मोहन भोग| यह लेने वाले को देते हैं दम में सौ-सौ भोग|यह मगध के मिष्ठान्न की उस परंपरा का एक ऐतिहासिक आख्यान है जो यह बताता है कि मगध साम्राज्य में मिठाईयों का कितना महत्व रहा होगा|[और पढ़े]
बिहार के प्यार की मिठास : सीतामढ़ी के खीरमोहन
खीर मोहन शब्द सुनते ही मुंह में पानी जाता है| ऐसा स्वाद जो पूरे प्रदेश में और कहीं नहीं बल्कि सीतामढ़ी में बने खीरमोहन में ही है| प्रदेश भर में यहां की चुनिंदा दुकानों में बने इस मिठाई की जबरदस्त मांग है| त्योहार या विशेष अवसरों पर इसकी काफी खपत होती है और इन दिनों इसे पाने के लिए एडवांस बुकिंग करानी पड़ती है| यहां के खीर मोहन का स्वाद इतना लाजवाब है कि राजनेताओं से लेकर अफसरों की पसंद बने हुए हैं|[और पढ़े]
अदरी बहुरिया कटहर न खाय, मोचा ले पिछवाड़े जाये
कटहल भले हमारे पड़ोसी देश बांग्लादेश का राष्ट्रीय फल है लेकिन कटहल का फल जिसे कोवा भी कहते हैं उसमें ठेठ बिहारीपन बसा हुआ है| भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की पटना इकाई ने जो दो उन्नत प्रजातियां विकसित की है उसमें सब्जी के लिए स्वर्ण पूर्ति अौर पके फल (कोवा) के लिए स्वर्ण मनोहर प्रजाति के रूप में पूरे देश में पायी जाती है| देश में जहां केरल ने कटहल की सबसे प्रजातियां चिह्नित की है लेकिन उनका फोकस कटहल से बनने वाले आटे और अनाज पर ज्यादा केंद्रित है वहीं फल पर बिहार का एकाधिकार है जो सभी जगहों पर दिखायी देती है|[और पढ़े]
Subscribe to:
Posts (Atom)






